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पंजाब में सीएम अमरिंदर सिंह को इन छह बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा!

चंडीगढ़: देश में मोदी लहर के बीच कांग्रेस के लिए जीत का परचम लहराने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री बन गए हैं. विधानसभा चुनाव में मोदी लहर में जब बड़े बड़े निपट गए तब पंजाब में कैप्टन कांग्रेस के लिए नई उम्मीद लेकर आए, अकाली और बीजेपी गठबंधन के अलावा पहली बार पंजाब का चुनाव लड़ रहे केजरीवाल की पार्टी को भी धूल चटा दी और कांग्रेस को भारी जीत दिलाई.

मुख्यमंत्री बनने के बाद कैप्टन के सामने होंगी ये चुनौतियां!

  • नशे के कारोबार को खत्म करना

कांग्रेस ने पंजाब में नशा कारोबार को गंभीर मुद्दा मानते हुए अपने मेनिफेस्टो में जगह देते हुए जनता से वादा किया था कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो नशा कारोबार को एक महीने में समाप्त कर दिया जाएगा. अब कैप्टन के सामने प्रदेश से नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने की चुनौती है. इसके लिए कैप्टन ने पार्टी के सभी विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने हलकों में पता लगाएं कि वहां नशे का कारोबार तो नहीं चल रहा है.

अमरिंदर सिंह ने 41 पुलिस अधिकारियों समेत कुल 73 तबादले किए हैं लेकिन जानकारों का मानना है कि नशे की समस्या तभी खत्म होगी जब अमरिंदर सरकार गुड गवर्नेंस लागू करके दिखाएगी.

  • प्रदेश की वित्तीय हालत को सुधारना

प्रदेश के पिछले बजट में करीब 1.25 लाख करोड़ का कर्ज दिखाया गया था, जो बीते कई सालों से लगातार बढ़ता आ रहा है. इसके परिणामस्वरूप सरकार के खजाने से हर साल एक बड़ी रकम कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रही है. अब कैप्टन के सामने चुनौती है कि वह प्रदेश की वित्तीय हालत को फिर से सुधार की पटरी पर वापस लाएं.

  • किसानों के कर्ज और कृषि विकास

पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते 9 सालों में पंजाब में कृषि विकास में गिरावट दर्ज की जा रही है. साल 2005-06 में 0.95 फीसदी की कृषि विकास दर 2014-15 में -3.4 फीसदी पर पहुंच गई है. इससे कृषि क्षेत्र काफी प्रभावित हो रहा है. जिससे किसानों पर कर्ज भी बढ़ गया है. हाल के दिनों में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भी लगातार इजाफा  हुआ है. अमरिंदर के सामने किसानों की आत्महत्याओं को रोकना और कृषि में विकास करने की बड़ी चुनौती है.

कांग्रेस ने किसानों के 67 हजार करोड़ के कर्ज को माफ करने का दावा किया है. उन्होंने फसल खराब होने पर 20 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजे के साथ खुदखुशी करने वाले किसान के परिवार को 10 लाख रुपए देने का वादा किया है.

  • बेरोजगारी खत्म करना

आंकड़ों के अनुसार पंजाब देश में ऐसा आठवां राज्य है, जहां ग्रामीण युवा बेरोजगारों की तादाद सबसे ज्यादा है. हालात यह हैं कि सूबे में 18-29 वर्ष उम्र वर्ग के औसतन 16.6 फीसदी बेरोजगार हैं, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आंकड़ा 10.2 फीसदी है.

रिपोर्टों से साफ है कि पंजाब में 75 लाख लोग बेरोजगार हैं. कांग्रेस ने ‘घर घर रोजगार’ का दावा किया है. उन्होंने 25 लाख नौकरियां जुटाने का दावा किया है. हालांकि वहां फिलहाल इंडस्ट्री, प्राईवेट और सरकारी सेक्टर में कोई नौकरी नहीं है.

  • उद्योग उपलब्ध कराना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2007 से 2014 के बीच राज्य में 18770 उद्योग बंद हो गए है. पंजाब प्रदेश कांग्रेस की कमेटी की ओर से जारी आंकड़ों में भी कहा गया है कि अमृतसर में 8053 उद्योग बंद हुए और कोई नया उद्योग स्थापित नहीं हो सका.

  • बिजली सब्सिडी

करीब 6000 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली सब्सिडी का पंजाब में एक अहम मुद्दा है. ये सब्सिडी अकाली-बीजेपी सरकार के वक्त भी किसानों को मिलती थी. अब अमरिंदर सरकार को लोकप्रिय बनने के लिए किसानों को बिजली सब्सिडी में राहत भी देनी होगी. इतना ही नहीं सरकार के लिए यह भी बड़ी चुनौती होगी कि पंजाब में बिजली की खपत कैसे बढ़े और सरप्‍लस बिजली को कहां बेचा जाए.

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